1. ग्लोबल साउथ क्या है?
ग्लोबल साउथ कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं है बल्कि ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) एक भू-राजनीतिक एवं आर्थिक अवधारणा है, जिसके अंतर्गत मुख्यतः एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरेबियाई क्षेत्र तथा ओशिनिया के विकासशील और उभरते देशों को रखा जाता है। यह केवल भौगोलिक अवधारणा नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक असमानता, औपनिवेशिक विरासत, विकास की चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के अभाव से संबंधित है।
इसके मुख्य उद्देश्य हैं:
- अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक संस्थाओं में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व।
- विश्व बैंक, IMF और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार।
- विकासशील देशों को जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण।
- ऋण संकट, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा का समाधान।
- दक्षिण–दक्षिण सहयोग (South–South Cooperation) को मजबूत करना।
- वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की स्वायत्त भागीदारी सुनिश्चित करना।
2. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में ग्लोबल साउथ का महत्त्व
शीतयुद्ध के दौरान विश्व मुख्यतः अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विभाजित था। शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात अमेरिका का प्रभुत्व बढ़ा, लेकिन 21वीं सदी में चीन, भारत, ब्राजील तथा अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने वैश्विक शक्ति-संतुलन को प्रभावित किया है।
Note :- आप इसके संबंध में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था देखें
3. ग्लोबल साउथ के संदर्भ में भारत की भूमिका
भारत स्वयं को ग्लोबल साउथ के हितों की आवाज उठाने वाले देश के रूप में प्रस्तुत करता है। भारत की यह भूमिका गुटनिरपेक्ष आंदोलन, पंचशील, उपनिवेशवाद-विरोध और दक्षिण–दक्षिण सहयोग की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है।
(A) ग्लोबल साउथ के लिए कूटनीतिक नेतृत्व :- Voice of Global South Summit, 2023: भारत ने 12–13 जनवरी 2023 को पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 125 देशों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य विकासशील देशों की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुख स्थान देना था। G20 की अध्यक्षता, 2023 नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ को G20 की स्थायी सदस्यता मिली। इससे विकासशील देशों का संस्थागत प्रतिनिधित्व मजबूत हुआ।
(B) भारत का विकास संबंधी दृष्टिकोण :- भारत का दृष्टिकोण मुख्यतः निम्न क्षेत्रों पर आधारित है:
- विकास साझेदारी: प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, ITEC कार्यक्रम और विकास परियोजनाएँ।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: डिजिटल भुगतान, डिजिटल पहचान तथा सार्वजनिक सेवाओं के लिए भारत के अनुभव को साझा करना।
- स्वास्थ्य कूटनीति: सस्ती दवाइयों, वैक्सीन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच बढ़ाना।
- जलवायु न्याय: विकसित देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी और विकासशील देशों की वित्तीय आवश्यकताओं को रेखांकित करना।
- रणनीतिक स्वायत्तता: अमेरिका, यूरोप, रूस तथा विकासशील देशों के साथ विभिन्न मुद्दों पर स्वतंत्र साझेदारी बनाए रखना।
इस प्रकार भारत ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच संवाद तथा सहयोग का सेतु बनने का प्रयास करता है।
(C) ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट, 2024 :_- अगस्त 2024 में तीसरे Voice of Global South Summit के दौरान भारत ने Global Development Compact प्रस्तावित किया। इसका उद्देश्य व्यापार, क्षमता निर्माण, तकनीकी साझेदारी तथा वित्तीय सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों को सशक्त बनाना था।
4. ग्लोबल साउथ के संदर्भ में चीन की भूमिका
चीन स्वयं को ग्लोबल साउथ का महत्वपूर्ण सदस्य और विकासशील देशों का साझेदार बताता है। हालाँकि उसकी विशाल अर्थव्यवस्था और वैश्विक शक्ति के कारण ग्लोबल साउथ में उसकी स्थिति पर विद्वानों के बीच मतभेद भी हैं।
(A) बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI), 2013
BRI चीन की प्रमुख वैश्विक संपर्क और अवसंरचना परियोजना है। इसका उद्देश्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप सहित विभिन्न क्षेत्रों में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, ऊर्जा तथा व्यापारिक संपर्क का विस्तार करना है। इससे अनेक विकासशील देशों को अवसंरचना निवेश मिला है। साथ ही कुछ परियोजनाओं को लेकर ऋण की स्थिरता, अनुबंधों की पारदर्शिता तथा रणनीतिक निर्भरता के प्रश्न भी उठे हैं।
(B) ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव (GDI), 2021
चीन ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से GDI प्रस्तुत किया। इसके प्रमुख क्षेत्र हैं:
- गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा।
- स्वास्थ्य तथा महामारी प्रबंधन।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और औद्योगिकीकरण।
- हरित विकास और प्रौद्योगिकी सहयोग।
सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में GDI पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें विकासशील देशों के लिए वित्त, तकनीक और डिजिटल सहयोग पर जोर दिया गया।
(C) अन्य प्रमुख चीनी पहलें
| पहल | प्रमुख उद्देश्य |
| Global Security Initiative (2022) | साझा और सहयोगात्मक सुरक्षा |
| Global Civilization Initiative (2023) | सभ्यताओं के बीच संवाद |
| FOCAC | चीन–अफ्रीका आर्थिक एवं विकास सहयोग |
| Global Governance Initiative (2025) | वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार का चीनी दृष्टिकोण |
| New Development Bank | BRICS और अन्य पात्र विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विकास वित्त |
जून 2025 के चीन–अफ्रीका चांग्शा घोषणापत्र में चीन और अफ्रीकी साझेदारों ने ग्लोबल साउथ की एकजुटता, BRI तथा चीनी वैश्विक पहलों पर सहयोग का समर्थन किया।
5. भारत और चीन की ग्लोबल साउथ संबंधी नीतियों की तुलना
| आधार | भारत | चीन |
| ऐतिहासिक आधार | गुटनिरपेक्षता, पंचशील, दक्षिण–दक्षिण सहयोग | विकासशील देश की पहचान, दक्षिण–दक्षिण सहयोग |
| प्रमुख दृष्टिकोण | प्रतिनिधित्व, रणनीतिक स्वायत्तता, विकास साझेदारी | व्यापार, निवेश, संपर्क और विकास साझेदारी |
| प्रमुख पहल | Voice of Global South, Global Development Compact | BRI, GDI, FOCAC |
| आर्थिक साधन | ऋण सहायता, प्रशिक्षण, डिजिटल तकनीक, परियोजनाएँ | बड़े पैमाने पर निवेश, व्यापार और अवसंरचना वित्त |
| वैश्विक संस्थाएँ | UNSC, IMF, विश्व बैंक में सुधार | वैश्विक शासन सुधार और वैकल्पिक सहयोग मंचों का विस्तार |
| पश्चिमी देशों से संबंध | सहयोग और स्वतंत्र विदेश नीति का संतुलन | अमेरिका के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तथा व्यापक आर्थिक संबंध |
| प्रमुख चुनौतियाँ | सीमित वित्तीय संसाधन, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ | ऋण स्थिरता संबंधी चिंताएँ, रणनीतिक अविश्वास |
यह तुलना नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाती है। व्यवहार में दोनों देशों की आर्थिक, राजनीतिक तथा विकास संबंधी भूमिकाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई भी हैं।
6. भारत–चीन संबंध: सहयोग और प्रतिस्पर्धा

विशेष विश्लेषण: भारत के लिए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अर्थ केवल अमेरिकी प्रभुत्व में कमी नहीं है। इसका अर्थ एशिया में भी अनेक स्वतंत्र शक्ति-केंद्रों का अस्तित्व है। भारत ऐसी व्यवस्था चाहता है, जिसमें कोई एक शक्ति एशियाई निर्णय प्रक्रिया पर प्रभुत्व स्थापित न करे। इसलिए भारत के लिए Multipolar World के साथ Multipolar Asia भी महत्वपूर्ण है।
दूसरी ओर चीन ग्लोबल साउथ के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी और वैश्विक संस्थाओं में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। दोनों की प्राथमिकताओं में कुछ समानताएँ और कुछ मतभेद हैं।
7. समसामयिक संदर्भ: BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र, सितंबर 2026
भारत की अध्यक्षता में 12–13 सितंबर 2026 को 18वाँ BRICS शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसके घोषणापत्र में ग्लोबल साउथ से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय और प्रतिबद्धताएँ सामने आईं। वैश्विक संस्थाओं में सुधार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF और विश्व बैंक में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई गई।
भारत की भूमिका पर चीन का समर्थन चीन और रूस ने भारत तथा ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं का समर्थन दोहराया। इसे स्थायी सदस्यता के लिए स्पष्ट समर्थन के समान नहीं समझना चाहिए।
- विकास वित्त BRICS Multilateral Guarantees पहल को आगे बढ़ाने और ग्लोबल साउथ के लिए विकास परियोजनाओं की वित्तीय लागत कम करने पर जोर दिया गया।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना BRICS देशों के बीच डिजिटल समाधानों, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के प्रस्तावों को आगे बढ़ाया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 के BRICS सत्र में ग्लोबल साउथ को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में नियम स्वीकार करने वाले से नियमों के निर्माण में भागीदार बनाने पर जोर दिया।
8. ग्लोबल साउथ के संदर्भ में भारत और चीन के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
1. प्रतिनिधित्व का प्रश्न: क्या भारत या चीन संपूर्ण ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जबकि विकासशील देशों की प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं?
2. ऋण एवं विकास वित्त: विकास परियोजनाओं के लिए पूँजी की आवश्यकता और बढ़ते ऋण का संतुलन।
3. भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा: भारत–चीन सीमा विवाद, हिंद महासागर तथा एशिया में प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा।
4. वैश्विक संस्थागत असमानता: UNSC और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में प्रतिनिधित्व संबंधी सुधारों की धीमी प्रगति।
5. जलवायु न्याय: विकासशील देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों में संतुलन।
6. तकनीकी निर्भरता: AI, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल अवसंरचना में सुरक्षित तथा न्यायसंगत पहुँच।
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि ग्लोबल साउथ के अनेक देश भारत, चीन, अमेरिका और यूरोप सभी से संबंध बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए उन्हें किसी एक देश के नेतृत्व वाला एकसमान राजनीतिक समूह मानना उचित नहीं होगा।
ग्लोबल साउथ, भारत–चीन एवं बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था: UPSC/BPSC Mains PYQ
1. UPSC PSIR Optional – वर्षवार PYQ
प्रश्न 1. “ग्लोबल साउथ के प्रति संवेदनशील वैश्वीकरण का मॉडल अत्यधिक केंद्रीकृत वैश्वीकरण से उत्पन्न खतरों को रोक सकता है।” चर्चा कीजिए। (2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 3(c) | 15 अंक)
प्रश्न 2. “भारत के लिए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अर्थ बहुध्रुवीय एशिया भी होगा।” टिप्पणी कीजिए।(2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 5(c) | 10 अंक)
प्रश्न 3. “बांग्लादेश में चीन की बढ़ती उपस्थिति और शक्ति-संतुलन में स्पष्ट परिवर्तन ने ढाका में भारत के प्रभाव को कमजोर किया है।” टिप्पणी कीजिए।(2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 5(a) | 10 अंक)
प्रश्न 4. अफ्रीका में भारत की नई रुचि के प्रमुख प्रेरक कारकों की चर्चा कीजिए, जो चीन की तुलना में भारत को दीर्घकालिक तुलनात्मक लाभ विकसित करने में सहायता कर सकते हैं।(2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 8(b) | 15 अंक)
प्रश्न 5. भारत, चीन और नेपाल के बीच त्रिपक्षीय आर्थिक सहयोग का नया चरण प्रारंभ करने में भारत की संभावित भूमिका की चर्चा कीजिए (2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 8(c) | 15 अंक)
प्रश्न 6. भारत की बढ़ती उदासीनता के संदर्भ में क्या गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का कोई भविष्य है? (2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 5(d) | 10 अंक)
प्रश्न 7. भारत उन देशों से मजबूत संबंध बनाए रखता है जो स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा शेष विश्व के साथ अधिक संपर्क सुनिश्चित कर सकते हैं। विश्लेषण कीजिए।(2025 | PSIR Paper-II | प्रश्न 6(b) | 15 अंक)
प्रश्न 8. क्या आप मानते हैं कि भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में 21वीं सदी को ‘एशियाई सदी’ बनाने की अवधारणा अभी भी व्यावहारिक है?(2024 | Paper-II | प्रश्न 6(b) | 15 अंक)
प्रश्न 9. 21वीं सदी में नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की स्थापना के उद्देश्य को प्राप्त करने में ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में भारत की संभावित भूमिका की चर्चा कीजिए।(2024 | Paper-II | प्रश्न 6(c) | 15 अंक)
प्रश्न 10. चीन के बढ़ते निवेश और आर्थिक प्रभुत्व के कारण श्रीलंका में उसका प्रभाव बढ़ने से भारत–श्रीलंका संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ है। विश्लेषण कीजिए। (2024 | Paper-II | प्रश्न 5(e) | 10 अंक)
प्रश्न 11. “विश्व की द्विध्रुवीय संरचना बहुध्रुवीय संरचना की तुलना में अधिक स्थिर होती है।” टिप्पणी कीजिए। (2022 | Paper-II | प्रश्न 1(d) | 10 अंक)
प्रश्न 12. एक महान शक्ति के रूप में चीन के उदय का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए तथा एशियाई राजनीतिक व्यवस्था पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।(2022 | Paper-II | प्रश्न 3(a) | 20 अंक)
प्रश्न 13. वैश्वीकरण के वर्तमान युग में नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (NIEO) की माँग की प्रासंगिकता की चर्चा कीजिए। (2022 | Paper-II | प्रश्न 6(a) | 20 अंक)
प्रश्न 14. 21वीं सदी में नई विश्व व्यवस्था के प्रति भारत के दृष्टिकोण की चर्चा कीजिए। (2022 | Paper-II | प्रश्न 8(c) | 15 अंक)
प्रश्न 15. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लाभों की पहचान कीजिए।(2019 | Paper-II | प्रश्न 3(b) | 15 अंक)
प्रश्न 16. उभरती शक्तियाँ IMF और विश्व बैंक में अमेरिका एवं पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को किस प्रकार चुनौती दे रही हैं?(2019 | Paper-II | प्रश्न 4(a) | 20 अंक)
प्रश्न 17. चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ (OBOR) पहल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए तथा भारत की प्रमुख चिंताओं का विश्लेषण कीजिए। (2019 | Paper-II | प्रश्न 6(a) | 20 अंक)
प्रश्न 18. नई विश्व व्यवस्था के संबंध में भारत के दृष्टिकोण का मूल्यांकन कीजिए। (2019 | Paper-II | प्रश्न 8(a) | 20 अंक)
3. UPSC Mains – General Studies PYQ
प्रश्न 19. “पश्चिमी देश चीन की आपूर्ति शृंखला पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को एक विकल्प के रूप में तथा चीन के राजनीतिक एवं आर्थिक प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं।” उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। UPSC 2024 | GS Paper-II | प्रश्न 9 | 10 अंक
प्रश्न 20. चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), चीन की व्यापक ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल का एक प्रमुख अंग माना जाता है। CPEC का संक्षिप्त वर्णन कीजिए तथा उन कारणों को बताइए जिनके चलते भारत ने इससे दूरी बनाई है। UPSC 2018 | GS Paper-III | प्रश्न 9 | 10 अंक
4. BPSC Mains –PYQ
इन प्रश्नों का ग्लोबल साउथ, भारतीय विदेश नीति और वैश्विक शक्ति-संतुलन से प्रत्यक्ष या वैचारिक संबंध है।
प्रश्न 21. नेहरू की विदेश नीति किस हद तक आदर्शवाद और व्यावहारिकता को प्रतिबिंबित करती थी? इसकी मुख्य विशेषताओं के संदर्भ में परीक्षण कीजिए। (GS Paper-I | प्रश्न 3(b) | 38 अंक 71वीं BPSC Mains, 2026)
प्रश्न 22. रूस–यूक्रेन युद्ध को तीन वर्ष पूरे हो गए हैं। इस युद्ध के कारणों पर प्रकाश डालते हुए विश्व राजनीति पर पड़ने वाले इसके प्रभावों की चर्चा कीजिए।(GS Paper-I | प्रश्न 4(b) | 8 अंक 70वीं BPSC Mains, 2025)
प्रश्न 23. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भविष्य कैसा होगा? तर्क सहित विश्लेषण कीजिए। (GS Paper-I | प्रश्न 4(e) | 7 अंक 70वीं BPSC Mains, 2025)
प्रश्न 24. G20 में भारत का नेतृत्व किस प्रकार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के प्राचीन दर्शन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है? वैश्विक सहयोग और विकास में भारत का दृष्टिकोण इस दर्शन के साथ किस प्रकार संरेखित होता है? परीक्षण कीजिए। (GS Paper-I | प्रश्न 5(b) | 38 अंक 69वीं BPSC Mains, 2024)
PYQ के आधार पर आगामी परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न
1. “ग्लोबल साउथ के नेतृत्व को लेकर भारत और चीन के बीच सहयोगात्मक प्रतिस्पर्धा की स्थिति दिखाई देती है।” आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
2. ग्लोबल साउथ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। भारत और चीन के विकास साझेदारी मॉडल की तुलनात्मक समीक्षा कीजिए। (250 शब्द)
3. “भारत के लिए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की स्थापना तभी सार्थक होगी जब एशिया भी बहुध्रुवीय बने।” चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में व्याख्या कीजिए। (250 शब्द)
4. ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को पूरा करने में BRICS की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। भारत एवं चीन की प्राथमिकताओं का उल्लेख कीजिए। (250 शब्द)
5. नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की स्थापना में भारत की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में चीन की BRI और भारत की विकास साझेदारी पहल का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
6. PYQ से निकलने वाले प्रमुख परीक्षा-विषय
| मुख्य विषय | संबंधित PYQ वर्ष |
| ग्लोबल साउथ एवं भारत का नेतृत्व | 2024, 2025 |
| बहुध्रुवीय विश्व एवं एशिया | 2019, 2022, 2025 |
| चीन का उदय एवं भारतीय रणनीतिक स्वायत्तता | 2019, 2022, 2024, 2025 |
| NIEO एवं वैश्विक आर्थिक संस्थाएँ | 2019, 2022, 2024 |
| भारत–चीन की अफ्रीका में भूमिका | 2025 |
| गुटनिरपेक्षता और भारतीय विदेश नीति | 2019, 2025, BPSC 2026 |
| G20 एवं वैश्विक नेतृत्व | BPSC 2024 |
