लोकतंत्र केवल चुनाव कराने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास, राजनीतिक समानता, जवाबदेही और पारदर्शिता पर आधारित शासन प्रणाली है। भारत में राजनीतिक दल लोकतंत्र के प्रमुख संस्थान हैं, जो नागरिकों को प्रतिनिधित्व देने के साथ शासन और जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने, संगठन संचालित करने, जनसंपर्क करने, नीतियों का प्रचार करने तथा कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसलिए राजनीतिक वित्तपोषण लोकतांत्रिक राजनीति का स्वाभाविक और आवश्यक अंग है। समस्या वित्तपोषण से नहीं, बल्कि उसके अपारदर्शी स्वरूप से उत्पन्न होती है। हालिया बीबीसी न्यूज़ हिंदी की जाँच के अनुसार, गुजरात के छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 2023-24 में लगभग ₹1,700 करोड़ का चंदा मिला, जो भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर पाँच राष्ट्रीय दलों के कुल ₹1,480 करोड़ से अधिक है। इससे राजनीतिक चंदे, कर छूट, वित्तीय पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की नियामकीय शक्तियों पर गंभीर सवाल उठते हैं।
| Latest Report 6 अगस्त 2026 . क्षेत्रीय दल ADR ने 40 क्षेत्रीय दलों का विश्लेषण किया। FY 2024-25 में इन दलों द्वारा घोषित ₹20,000 से अधिक के चंदे का मूल्य बढ़कर ₹1,051.56 करोड़ हो गया, जबकि FY 2023-24 में यह लगभग ₹347.69 करोड़ था—अर्थात लगभग तीन गुना वृद्धि। सबसे अधिक donation DMK ने घोषित किया—₹365.78 करोड़, । इसके बाद प्रमुख दलों में AITC, YSR Congress और TDP रहे। FY 2024-25 के शीर्ष पाँच क्षेत्रीय दलों—DMK, AITC, YSR Congress, TDP और AIADMK—को मिलाकर ₹840.13 करोड़, यानी वर्ष के कुल घोषित चंदे का लगभग 79.9% प्राप्त हुआ। . Corporate Funding सबसे बड़ा स्रोत ADR के अनुसार FY 2023-24 और 2024-25 को मिलाकर कॉर्पोरेट/व्यावसायिक घराने ने क्षेत्रीय दलों को ₹872.54 करोड़ दिए, जो दोनों वर्षों के कुल दान का मूल्य (donation value) का 62.36% था। केवल FY 2024-25 में कॉर्पोरेट/व्यावसायिक दान लगभग ₹644.93 करोड़, यानी लगभग 61.33% रहे। FY 2024-25 में क्षेत्रीय दलों को ऐसे donors से लगभग ₹302.67 करोड़ मिले जिनके नाम घोषित नहीं थे। यह कुल चंदे का लगभग 28.78% था। इससे भी महत्वपूर्ण यह कि लगभग ₹329.58 करोड़ के चंदे में PAN details उपलब्ध नहीं थीं, जो उस वर्ष के चंदे का करीब 31.3% था। ADR ने यह भी पाया कि FY 2024-25 में 1,978 चंदे, कुल लगभग ₹13.39 करोड़, ऐसे थे जिनमें payment mode घोषित नहीं किया गया था। राष्ट्रीय दलों की ADR Report FY 2024-25 में छह राष्ट्रीय दलों ने ₹20,000 से अधिक के 11,343 चंदे, कुल ₹6,648.56 करोड़ घोषित किए। इनमें: BJP — ₹6,074.02 करोड़ INC — ₹517.39 करोड़ BSP ने ₹20,000 से अधिक का कोई donation घोषित नहीं किया। BJP के चंदे FY 2023-24 के ₹2,243.95 करोड़ से बढ़कर FY 2024-25 में ₹6,074.02 करोड़ हो गए—लगभग 171% की वृद्धि। कांग्रेस को मिले चंदे ₹281.48 करोड़ से बढ़कर ₹517.39 करोड़ हुए—लगभग 84% वृद्धि। FY 2024-25 में राष्ट्रीय दलों को कॉर्पोरेट/व्यावसायिक क्षेत्र से 3,244 दान के माध्यम से ₹6,128.79 करोड़ मिले। यह कुल घोषित चंदे का लगभग 92.18% था। व्यक्तिगत दानदाता से लगभग ₹505.66 करोड़, यानी 7.61% प्राप्त हुआ। ADR Report 2026: राष्ट्रीय दलों के ₹20,000 से अधिक के घोषित चंदे में लगभग 92.18% धन कॉर्पोरेट/व्यावसायिक क्षेत्र से आया। ADR द्वारा उजागर पारदर्शिता की कमी (Transparency Deficit) राष्ट्रीय दलों की रिपोर्ट में ADR ने पाया कि भाजपा, कांग्रेस, सीपीआई (एम) और एनपीईपी ने कुल 205 चंदे, लगभग ₹3.47 करोड़, में PAN details उपलब्ध नहीं कराईं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में चेक/डीडी डोनेशन में चेक नंबर, बैंक डिटेल्स या एनकैशमेंट डिटेल्स अधूरी थीं, जिससे धन का मार्ग (money trail) का पता लगाना कठिन होता है। रिपोर्ट दाखिल करने में भी देरी देखी गई—INC ने 23 दिन, CPI(M) ने 66 दिन और BJP ने 68 दिन की देरी से योगदान रिपोर्ट जमा कीं। “ADR के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि राजनीतिक वित्तपोषण में कॉर्पोरेट क्षेत्र की प्रधानता बनी हुई है, जिससे राजनीतिक समानता, नीति पर कब्ज़ा तथा quid-pro-quo (प्रतिदान )संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं।” |
पंजीकृत गैर–मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act—RP Act) की धारा 29A के तहत नागरिकों द्वारा गठित राजनीतिक दल निर्वाचन आयोग के समक्ष पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों की जाँच और निर्धारित शर्तों की पूर्ति के बाद निर्वाचन आयोग ऐसे दलों को पंजीकृत करता है। यदि कोई दल चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्य दल नहीं है, तो वह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल यानी आरयूपीपी की श्रेणी में आता है।
- पंजीकरण के कारण राजनीतिक दलों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। इनमें राजनीतिक चंदे पर आयकर संबंधी छूट, लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में सामान्य चुनाव चिह्न प्राप्त करने की सुविधा तथा चुनाव प्रचार के दौरान 20 स्टार प्रचारकों की अनुमति प्रमुख हैं। बदले में इन दलों पर वित्तीय एवं वैधानिक पारदर्शिता की जिम्मेदारी भी होती है।
- आरयूपीपी को एक वित्तीय वर्ष में ₹20,000 से अधिक का योगदान देने वाले व्यक्तिगत दाताओं का विवरण निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराना होता है। आवश्यक विवरण प्रस्तुत न करने पर संबंधित दल आयकर छूट खो सकता है। इसके अतिरिक्त, ₹2,000 से अधिक के दान को चेक या बैंक हस्तांतरण जैसे बैंकिंग माध्यमों से स्वीकार करने की व्यवस्था की गई है।
| भारत में राजनीतिक दल बनाने और उसे Election Commission of India (ECI) में पंजीकृत कराने की प्रमुख शर्तें Representation of the People Act, 1951 की धारा 29A तथा ECI की registration guidelines में दी गई हैं। मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं: राजनीतिक दल बनाने वाला संगठन भारतीय नागरिक संघ/निकाय होना चाहिए। दल बनने के 30 दिन पहले चुनाव आयोग में पंजीकरण के लिए आवेदन करना होता है। पार्टी का नाम पहले से मौजूद दल से स्पष्ट रूप से अलग होना चाहिए और नाम में धर्म, जाति या सांप्रदायिक संकेत नहीं होना चाहिए। पार्टी की membership सभी वयस्क भारतीय नागरिकों के लिए खुली होनी चाहिए और उसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए। पार्टी का लिखित संविधान (Party Constitution) होना आवश्यक है, जिसमें संगठनात्मक संरचना, पदाधिकारियों की शक्तियाँ, चुनाव प्रक्रिया, अनुशासन, धन और खातों की व्यवस्था, संविधान संशोधन, विलय तथा विघटन की प्रक्रिया लिखी हो। पार्टी के संविधान में स्पष्ट घोषणा होनी चाहिए कि वह भारत के संविधान के प्रति निष्ठा, तथा समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों में विश्वास रखेगी और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करेगी। यह धारा 29A(5) की अनिवार्य शर्त है। • ECI गाइडलाइंस के अनुसार कम-से-कम 100 सदस्यों के इलेक्टोरल रोल/EPIC सबूत तथा उनके एफिडेविट देने होते हैं कि वे रजिस्टर्ड इलेक्टर्स हैं और किसी अन्य रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी के सदस्य नहीं हैं। अध्यक्ष/महासचिव की ओर से हलफनामा, पार्टी कार्यालय का प्रमाण पत्र/एनओसी, बैंक खाता/पैन विवरण और प्रमुख पदाधिकारियों की संपत्ति-देनदारियां, पैन, आय विवरण और आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी शामिल है।पार्टी के खातों का audit होना चाहिए और annual financial statements ECI को प्रस्तुत करने का प्रावधान पार्टी संविधान में होना चाहिए। पार्टी संविधान में आंतरिक लोकतंत्र और नियमित संगठनात्मक चुनाव का प्रावधान होना चाहिए। ECI guideline में पदाधिकारियों/संगठनात्मक चुनावों की नियमितता भी अपेक्षित है। पार्टी को अपने संविधान में यह भी घोषित करना होता है कि वह registration के बाद 5 वर्ष के भीतर ECI द्वारा आयोजित किसी चुनाव में भाग लेगी; लगातार 6 वर्ष तक चुनाव न लड़ने पर उसे registered parties की सूची से हटाया जा सकता है। पंजीकरण प्रक्रिया में प्रस्तावित नाम दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय दैनिक समाचारपत्रों में दो दिनों के लिए प्रकाशित किया जाता है ताकि युवाओं को आमंत्रित किया जा सके; सामान्यतः आपत्ति अवधि 30 दिन रहती है। |
लेटर पैड पार्टियों की चुनौती
- मुख्य समस्या आरयूपीपी की संख्या और उनकी वास्तविक राजनीतिक सक्रियता के बीच अंतर से जुड़ी है। निर्वाचन आयोग के अनुसार जुलाई 2025 तक देश में 2,800 से अधिक आरयूपीपी थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में इनमें से केवल लगभग 750 दलों ने चुनाव लड़ा। शेष दलों को प्रायः ‘लेटर पैड पार्टियाँ’ कहा जाता है, क्योंकि उनकी राजनीतिक गतिविधियाँ अत्यंत सीमित होती हैं।
- यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान आरपी एक्ट निर्वाचन आयोग को केवल चुनाव न लड़ने, आंतरिक संगठनात्मक चुनाव न कराने या आवश्यक रिटर्न दाखिल न करने के आधार पर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने की स्पष्ट शक्ति नहीं देता।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बनाम Institute of Social Welfare & Ors. (2002) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया था कि आरपी एक्ट के तहत निर्वाचन आयोग सामान्य परिस्थितियों में राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द नहीं कर सकता। केवल असाधारण परिस्थितियों में, जैसे धोखाधड़ी से पंजीकरण प्राप्त करना, संविधान के प्रति निष्ठा समाप्त करना या सरकार द्वारा दल को गैरकानूनी घोषित किया जाना, पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। इस सीमित शक्ति के कारण बड़ी संख्या में निष्क्रिय दल लंबे समय तक पंजीकृत बने रह सकते हैं।
वित्तीय पारदर्शिता का संकट
- आरयूपीपी की वित्तीय पारदर्शिता भी गंभीर चिंता का विषय है। Association for Democratic Reforms की जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 के संदर्भ में केवल लगभग 26% आरयूपीपी की वार्षिक रिपोर्टें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थीं। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों की वित्तीय गतिविधियों और चंदे से संबंधित जानकारी सार्वजनिक निगरानी से बाहर रहती है।
- यदि किसी राजनीतिक दल को कर छूट, चुनाव चिह्न और अन्य सुविधाएँ मिलती हैं, लेकिन उसकी वित्तीय गतिविधियों की पर्याप्त सार्वजनिक निगरानी नहीं होती, तो ऐसी व्यवस्था के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। कुछ निष्क्रिय दलों को कर चोरी, धन शोधन और अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आशंका इसी कारण पैदा होती है।
- यह समस्या केवल चुनावी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि सुशासन, वित्तीय जवाबदेही और लोकतांत्रिक पारदर्शिता से भी जुड़ी हुई है।
सुधार की आवश्यकता
- इस समस्या से निपटने के लिए निर्वाचन आयोग को पर्याप्त वैधानिक शक्तियाँ देना आवश्यक है। विधि आयोग की 255वीं रिपोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि कोई राजनीतिक दल लगातार 10 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ता, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सके। निर्वाचन आयोग ने भी 2016 के अपने चुनाव सुधार संबंधी ज्ञापन में आरपी एक्ट में संशोधन कर उसे पंजीकरण रद्द करने की शक्ति देने की सिफारिश की थी।
- हालाँकि, केवल चुनाव लड़ने की शर्त पर्याप्त नहीं होगी। कोई दल केवल कानूनी औपचारिकता पूरी करने के लिए एक-दो उम्मीदवार उतारकर भी अपनी स्थिति बनाए रख सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों की वित्तीय गतिविधियों की आयकर विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा डिजिटल निगरानी आवश्यक है। संदिग्ध लेन-देन, असामान्य चंदे और दानदाताओं के पैटर्न की नियमित जाँच की जानी चाहिए।
- निर्वाचन आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि चुनाव में सीट जीतने वाले दलों को ही कर छूट दी जाए। लेकिन यह व्यवस्था लोकतांत्रिक दृष्टि से अत्यधिक कठोर हो सकती है, क्योंकि कई छोटे दल नियमित रूप से चुनाव लड़ते हैं, परंतु उन्हें सीट नहीं मिलती। इससे राजनीतिक बहुलवाद प्रभावित हो सकता है।
- इसके बजाय उचित न्यूनतम मत-प्रतिशत की सीमा निर्धारित करना अधिक संतुलित उपाय हो सकता है। जिस प्रकार आरयूपीपी (RUPPs) को सामान्य चुनाव चिह्न प्रदान करने के लिए मत-प्रतिशत से संबंधित प्रावधान हैं, उसी प्रकार एक उपयुक्त वोट-शेयर सीमा पूरी करने वाले दलों को ही राजनीतिक चंदे पर कर छूट का लाभ दिया जा सकता है।
| Supreme Court का 15 February 2024 निर्णय 2024 के Electoral Bonds judgment ने भारतीय राजनीतिक वित्तपोषण के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने Electoral Bond Scheme तथा उससे संबंधित कुछ संशोधनों को असंवैधानिक ठहराया। न्यायालय ने विशेष रूप से कहा कि political funding की जानकारी मतदाता के right to information under Article 19(1)(a) के लिए महत्वपूर्ण है। Corporate funding के संबंध में भी बड़ा निर्णय Finance Act 2017 के माध्यम से Companies Act में बदलाव करके कंपनियों के राजनीतिक योगदान पर पहले मौजूद सीमा हटाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने unlimited corporate contribution की अनुमति देने वाले परिवर्तन को arbitrary और Article 14 के विरुद्ध माना Electoral Bonds data का सार्वजनिक होना सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद SBI से electoral bonds से संबंधित जानकारी प्राप्त की गई और Election Commission ने मार्च 2024 में इसे सार्वजनिक किया। ECI ने 21 March 2024 को भी Electoral Bonds data की public disclosure जारी की। इसका महत्व यह था कि राजनीतिक वित्त पर पहली बार नागरिक, पत्रकार, शोधकर्ता और civil society विस्तृत विश्लेषण कर सके। |
समाधान
- पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक भागीदारी और बहुलवाद के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का अर्थ वित्तीय जवाबदेही से मुक्त होना नहीं है। वर्तमान व्यवस्था में राजनीतिक दलों की बड़ी संख्या, सीमित नियामकीय शक्तियाँ और कमजोर वित्तीय प्रकटीकरण एक गंभीर संस्थागत चुनौती प्रस्तुत करते हैं।
- आवश्यकता ऐसी संतुलित व्यवस्था की है जो एक ओर छोटे एवं नए राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करे और दूसरी ओर राजनीतिक चंदे के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करे। इसके लिए निर्वाचन आयोग को उपयुक्त de-registration powers, राजनीतिक दलों द्वारा अनिवार्य एवं समयबद्ध वित्तीय प्रकटीकरण, डिजिटल लेन-देन की निगरानी तथा कर छूट के लिए उचित मत-प्रतिशत सीमा जैसे सुधार लागू किए जाने चाहिए।
- अंततः राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता लोकतंत्र की विश्वसनीयता का अनिवार्य आधार है। राजनीतिक दलों को मिलने वाली सुविधाएँ जनता के विश्वास और वैधानिक जवाबदेही के साथ जुड़ी होनी चाहिए, ताकि चुनावी लोकतंत्र का उपयोग किसी भी प्रकार की अवैध वित्तीय गतिविधि के लिए न किया जा सके।
PREVIOUS YEAR QUESTION
- “Representation of the People Act, 1951 के संदर्भ में ‘corrupt practices’ की चर्चा कीजिए। क्या विधायकों अथवा उनके सहयोगियों की ज्ञात आय के स्रोतों से असंगत संपत्ति-वृद्धि ‘undue influence’ तथा फलतः corrupt practice मानी जा सकती है? UPSC 2025, GS-II — 10 अंक
- “विभिन्न समितियों द्वारा सुझाए गए चुनाव सुधारों की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से ‘एक राष्ट्र–एक चुनाव’ के संदर्भ में। UPSC 2024, GS-II — 10 अंक, 150 शब्द
- “स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में Electoral Identity Card किस उद्देश्य की पूर्ति करता है? 63rd BPSC