65th BPSC
1. क्या आप इस वक्तव्य से सहमत हैं कि हमारे संविधान ने एक हाथ से मौलिक अधिकार दिये हैं, किन्तु दूसरे हाथ से उन्हें वापस ले लिया है?
2. “भारतीय संसद एक गैर-प्रभुतासम्पन्न विधि-निर्मात्री संस्था है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
66th BPSC
3. “भारत के राष्ट्रपति की भूमिका परिवार के उस बुजुर्ग के समान है जो सभी प्राधिकार रखता है किन्तु यदि घर के शैतान-युवा सदस्य उसकी न सुनें तो वह कुछ भी प्रभावी नहीं कर सकता है।” मूल्यांकन कीजिए।
4. भारतीय संघीय ढाँचा संवैधानिक रूप से केन्द्र सरकार की ओर उन्मुख है। व्याख्या कीजिए।
5. भारत की संसद राष्ट्रीय एकीकरण का एक प्रभावी मंच है। विवेचना कीजिए।
67th BPSC
6. “भारतीय संसद स्वायत्त विधानमंडल नहीं है। इसकी शक्तियाँ विशाल तो हैं, पर असीम नहीं।” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए और इस पर प्रकाश डालिए कि भारतीय संसद की तुलना उसके ब्रिटिश समकक्ष से क्यों नहीं की जा सकती।
7. बिहार के विशेष संदर्भ में भारत में केन्द्र-राज्य संबंधों की समस्या और भविष्य में इसकी संभावनाओं की चर्चा कीजिए। जाँच कीजिए कि सहकारी संघवाद के अनुरूप समस्या को रचनात्मक रूप से कैसे संभाला जा सकता है।
8. भारत में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के उदय का वर्णन कीजिए। क्या आपको लगता है कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एकता को संतुष्ट करने के लिए क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का अस्तित्व अच्छा है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
9. एक स्वतंत्र न्यायपालिका, जिसे ‘न्यायिक समीक्षा’ की शक्ति प्राप्त है, भारत के संविधान की एक प्रमुख विशेषता है। क्या आपको लगता है कि ‘न्यायिक सक्रियता’ ने सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों को और बढ़ा दिया है? उदाहरण सहित समझाइए।
68th BPSC
10. निम्नलिखित प्रश्नों के लघु उत्तर लिखिए:
- भारत में गत्यात्मक धर्म-निरपेक्षता को आलोचनात्मक दृष्टि से विश्लेषित कीजिए।
- भारत में क्षेत्रीय राजनीति अपनी भूमिका निभाती है। व्याख्या कीजिए।
- भारत के संविधान में सकारात्मक निर्देश देश में सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के एक चार्टर के रूप में हैं। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक पुनरावलोकन क्षेत्राधिकार को स्पष्ट कीजिए।
- बिहार ने पिछले दशकों में अपनी राजनीतिक संस्कृति में सुधार देखा है। उदाहरण दीजिए।
11. (a) “क्षेत्रीय परिषदों के अंतर्गत देश में, राष्ट्रीय हित की सर्वोपरिता प्रतिस्थापित है।” भारत में क्षेत्रीय परिषदों की प्रकृति एवं कार्यशैली का उपर्युक्त कथन के परिप्रेक्ष्य में, आलोचनात्मक दृष्टि से परीक्षण कीजिए।
अथवा
(b) जाति भारतीय राजनीति में एक भूमिका निभाती है। दशकों में इसके कामकाज में बदलाव आया है। आप पिछले कई दशकों में इसकी बदलती भूमिका को कैसे देखते हैं?क्या विकास का तर्क जाति के चरित्र को कमजोर करता है? अपने कारण दीजिए।
12. (a) भारत के चुनाव आयोग ने चुनाव कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दशकों से चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाने में इसकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। बिहार में शेषन-पूर्व और शेषन युग के बाद चुनावों के संचालन के संदर्भ में अपने उत्तर के कारण दीजिए। यह लोकतंत्र को मजबूत करने में कैसे योगदान देता है?
अथवा
(b) राज्य सभा की संरचना एवं शक्तियों की विवेचन कीजिए तथा संसद के द्वितीय सदन के रूप में इसकी भूमिका का उल्लेख कीजिए।
69th BPSC
13. निम्नलिखित प्रश्नों के लघु उत्तर लिखिए :
- भारतीय संविधान से सम्बन्धित मूल ढाँचे के सिद्धांत का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
- क्या आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ई० डब्ल्यू० एस०) हेतु आरक्षण तर्कसंगत है? टिप्पणी कीजिए।
- भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया का आलोचनात्मक वर्णन कीजिए।
- बताइए कि किस प्रकार भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान के उद्देश्यों की कार्य-योजना प्रस्तुत करती है।
- जातीय जनगणना किस प्रकार से बिहार की राजनीति को प्रभावित करेगी, इसका वर्णन कीजिए।
14. (a) भारतीय संवैधानिक पाठ के अनुसार राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के बीच संस्थागत सम्बन्ध पर चर्चा कीजिए। वर्तमान संदर्भ में उनकी बदलती भूमिका पर चर्चा कीजिए।
अथवा
(b) “भारतीय संघवाद मूल रूप से राष्ट्रीयता के दो एक-साथ प्रयासों में निहित है : राज्य-आधारित सांस्कृतिक विविधताओं को अपनाना और बड़े भारतीय राजनीतिक समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता।” उपरोक्त कथन के आलोक में संघवाद के भारतीय मॉडल की प्रकृति का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
15. (a) बिहार में गठबन्धन की राजनीति के मूल सिद्धांतों की, विशेषतः राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के दृष्टिकोण से, विवेचित एवं विश्लेषित कीजिए।
अथवा
(b) स्थानीय शासन एवं उसकी कार्यपद्धति को पंचायत राज तथा शहरी संस्थाओं के सशक्तीकरण के दृष्टिकोण से, बिहार में धरातलीय स्तर से उदाहरणों के साथ, स्पष्ट तथा मूल्यांकित कीजिए।
70th BPSC
16. निम्नलिखित प्रश्नों के लघु उत्तर लिखिए:
- अनुच्छेद – 32 “भारत के संविधान का हृदय और आत्मा है”। व्याख्या कीजिए ।
- “राजनीति का अपराधीकरण और अपराधियों का राजनीतिकरण”। बिहार राज्य के संदर्भ में इस कथन का विश्लेषण कीजिए ।
- “भारत में वर्तमान में जाति एक सामाजिक घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह एक राजनीतिक घटना है”। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? विश्लेषण करें और अपने उत्तर के समर्थन में कारण बताएँ ।
- कॉलेजियम क्या है? यह आलोचना के केंद्र में क्यों है? अपने विचार व्यक्त कीजिए ।
- भारत के संविधान में 73वें और 74वें संशोधन के आलोक में, बिहार में जमीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने में स्थानीय स्वशासन की भूमिका पर चर्चा करें ।
17. (a) भारत में एक पार्टी के प्रभुत्व से लेकर गठबंधन सरकारों के युग तक राजनीतिक दलों के विकास का पता लगाएँ। क्या गठबंधन की राजनीति ने भारत में प्रधान मंत्री के अधिकार को कमजोर किया है? कारण बताएँ ।
अथवा
(b) “जब केंद्र में सरकार बदलती है, तो राज्यपाल भी बदल जाते हैं”। इस कथन के संदर्भ में केंद्र और राज्यों के बीच एक कड़ी के रूप में भारत में राज्यपाल की भूमिका की जाँच करें। क्या वह किसी भी तरह से अपने विवेक के अनुसार कार्य कर सकते हैं?
18. (a) “सम्प्रेषण का माध्यम होने के अतिरिक्त, भाषा अस्मिता के प्रतीक के रूप में प्रभावी रही है।” इस कथन के आलोक में, भारत में भाषायी अस्मिता के राजनीतिक प्रभाव का विश्लेषण कीजिए ।
अथवा
(b)अनुच्छेद – 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू और कश्मीर में राजनीतिक और संवैधानिक परिवर्तनों पर एक निबंध लिखिए ।